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Showing posts from September, 2025

दूरदर्शन के स्वर्णिम दौर की यादें

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दूरदर्शन के स्वर्णिम दौर की यादें श्री रघुनाथ सिंह (आत्मकथ्य) (वरिष्ठ सेवानिवृत्त दूरदर्शन अधिकारी)                       दाएं श्री रघुनाथ सिंह जी 15 सितंबर 2025 का दिन मेरे लिए विशेष रहा। दूरदर्शन का 66वाँ स्थापना दिवस नई दिल्ली में संविधान क्लब ऑफ इंडिया में बड़े धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार श्रीमती शीला चमन द्वारा लिखित पुस्तक “दूरदर्शन डायरीज़: टेलीविज़न का स्वर्ण युग” का विमोचन हुआ। कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली स्टडी ग्रुप ने ओम बुक्स इंटरनेशनल के सहयोग से किया और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पूर्व उपमंत्री श्री गुलाम नबी आज़ाद ने पुस्तक का अनावरण किया। यह पुस्तक पढ़ते समय मुझे अपने उन दिनों की याद आ गई जब दूरदर्शन की टीम ने सीमित संसाधनों के बावजूद समाज के प्रत्येक वर्ग तक उपयोगी कार्यक्रम पहुँचाने का संकल्प लिया था। विशेष रूप से कृषि दर्शन और अन्य कृषि कार्यक्रमों के संचालन का मुझे सौभाग्य मिला। हमारे प्रयासों का लक्ष्य हमेशा यह रहा कि किसान भाइयों तक वैज्ञानिक जानकारी, नई तकनीकें, मौसम की जानकारी और बाजार से ...

आत्महत्या रोकथाम पर कार्यशाला

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आत्महत्या रोकथाम पर कार्यशाला   श्री प्रवेन्द्र दहिया   (चेयरमैन – मेरा वजूद फाउंडेशन)  का वक्तव्य (स्व-व्याख्यात्मक नोट) “आत्महत्या एक गंभीर समस्या है, जो किसी भी परिवार और समाज को गहराई से प्रभावित कर सकती है। हम सभी किसी न किसी परिवार का हिस्सा हैं – कोई किसी का बेटा है, कोई बेटी है, कोई पिता है, कोई माँ है। ऐसे में तनाव, संघर्ष और मानसिक दबाव जीवन का हिस्सा बनते हैं। परंतु यह जरूरी है कि हम कठिन समय में अपनी सोच को सकारात्मक बनाए रखें और अपने मन की बात अपने साथी, मित्र, माता-पिता या किसी भरोसेमंद व्यक्ति से साझा करें। मनोविज्ञान विशेषज्ञ डॉ. ममता अग्रवाल ने कार्यशाला में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि आत्महत्या जैसे विचार समस्याओं का समाधान नहीं हैं। छात्र जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाकर, नकारात्मक लोगों से दूरी बनाकर, आशावादी सोच के साथ चुनौतियों का सामना करना चाहिए। संघर्ष और कठिनाइयाँ जीवन का हिस्सा हैं, परंतु धैर्य और विवेक से उन्हें पार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह समय है जब मेहनत करके हम अपने लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं। डॉ. ममता ...

शिक्षक इकराम सिंह जी का प्रेरक संबोधन:

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  इकराम सिंह जी का प्रेरक संबोधन “भाइयो और बहनो!  आज मैं आपको एक ऐसी वास्तविक कहानी सुनाने जा रह हूँ जो सिर्फ एक छात्रा की सफलता नहीं, बल्कि संकल्प, तपस्या और त्याग की मिसाल है। अमरोहा जिले के सिबोरा गांव की बेटी नेहा पंवार  ने यह साबित कर दिया है कि अगर मन में जिद हो, लक्ष्य स्पष्ट हो और परिवार साथ दे तो तारे तोड़ लाने जैसे कठिन से कठिन प्रयास भी संभव हैं। नेहा ने अपने माता‑पिता के सपनों को साकार करने के लिए बचपन से ही परिश्रम किया। उसकी माँ एक साधारण गृहिणी हैं, जिन्होंने अपने छोटे‑छोटे सुख त्याग कर बेटी को शिक्षित करने में अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। उसके पिता दुष्यंत कुमार, जो सीमा पर अपनी जान जोखिम में डालकर देश की सेवा कर रहे हैं—98 बटालियन कुपवाड़ा में NCO के पद पर कार्यरत—ने परिवार के सुख‑सुविधाओं को पीछे छोड़ अपने कर्तव्य को प्राथमिकता दी, ताकि बेटी का भविष्य उज्ज्वल हो सके। उन्होंने कभी सुविधा, कभी आराम, कभी अकेलेपन को अपनी राह में रोड़ा नहीं बनने दिया। उनके त्याग ने नेहा के सपनों को ताकत दी। नेहा ने गुरुकुल चोटीपुरा में कक्षा पाँच से लेकर परास्नातक तक शिक्षा...

डॉ. अशोक चौधरी की अनुभूतियाँ

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रानी नायकी देवी सोलंकी पर   आलेख   रचना से प्रकाशन तक भारतीय इतिहास में वीरांगनाओं के अद्वितीय योगदान को लेकर मेरे मन में लंबे समय से एक गहरी जिज्ञासा और श्रद्धा थी। विशेष रूप से महिलाओं की वीरता, बलिदान और नेतृत्व से जुड़ी घटनाएँ मुझे प्रेरित करती थीं। इसी भावना से मैंने सबसे पहले महाबलिदानी पन्ना धाय पर लेख लिखा, जिन्होंने अपने पुत्र का बलिदान देकर राजवंश की रक्षा की। उस लेख ने मुझे और अधिक प्रेरित किया कि इतिहास में ऐसी अन्य वीरांगनाओं की गाथाओं को भी सामने लाया जाए ताकि आज की पीढ़ी उनमें से साहस और समर्पण की प्रेरणा ले सके। इसके बाद मैंने रानी नायकी देवी सोलंकी पर लेख लिखने का निश्चय किया। शोध करते समय रानी नायकी देवी का व्यक्तित्व मेरे सामने एक जाज्वल्यमान आदर्श के रूप में उभरा—एक ऐसी नारी जिसने मोहम्मद गौरी जैसे आक्रांता को पराजित कर अपने राज्य की रक्षा की और नेतृत्व, चातुर्य तथा साहस का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। लेख लिखते समय मन श्रद्धा, गर्व और जिम्मेदारी से भरा हुआ था। हर शब्द के साथ यह भावना जुड़ती गई कि यह लेख केवल ऐतिहासिक विवरण न होकर एक प्रेरक संदेश बने। लेख पू...

✉️ पाती अपनों को - एक अनूठी मुहिम

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✉️ पाती अपनों को           एक अनूठी मुहिम डॉ. सूरज सिंह नेगी संयोजक , पाती अपनों को मुहिम अवसर : शिक्षक दिवस, 5 सितंबर 2025 मंच : गूगल मीट सात वर्षों की यात्रा * पाती अपनों को की शुरुआत 5 सितंबर 2018 को हुई। * पत्र लेखन को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया गया। * आज यह पहल वटवृक्ष की तरह फैल चुकी है, क्योंकि इसमें -  आप सबका सहयोग, विश्वास और अपनापन है। पाती क्यों? * यह महज़ पत्र लिखने की प्रतियोगिता नहीं है। * इसमें छिपा उद्देश्य है:   * संवेदनाओं को सहेजना,   * रिश्तों की अहमियत समझना,   * नई पीढ़ी को संस्कार देना। * चयनित पत्रों को पुस्तक का रूप दिया जाता है। अब तक पन्द्रह पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, सोलहवीं और सत्रहवीं प्रकाशनाधीन हैं। सहयोग और आभार * पत्र लेखक : जिन्होंने अपनी भावनाओं से पाती लिखीं। * निर्णायक : जिन्होंने निष्पक्ष मूल्यांकन किया। * संस्थान व व्यक्ति : जिनके सहयोग से पुस्तकें छप पाईं। * गुरुजन व परिजन : जिन्होंने बच्चों को प्रेरित किया। * मीडिया , डाक विभाग व समीक्षक : जिन्होंने संदेश को प्रसारित किया। विशेष स्मर...

वृक्षारोपण में प्रतिभाग संबंधी विवरण

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 श्री अनिल बैंसला का वक्तव्य "आज मेरे लिए यह अत्यंत हर्ष और गर्व का विषय है कि दिल्ली नगर निगम द्वारा आयोजित मेगा पौधरोपण कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर प्राप्त हुआ। यह आयोजन पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता का अद्भुत उदाहरण रहा, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों ने मिलकर सक्रिय सहभागिता की। इस शुभ अवसर पर श्री दिलखुश मीणा जी (IAS, साउथ दिल्ली), श्री वेदपाल लोहिया जी (पार्षद, आयानगर), दक्षिण दिल्ली के सांसद श्री रामवीर सिंह बिधूड़ी जी के सुपुत्र श्री सुरेंद्र सिंह बिधूड़ी, बागवानी विभाग, दिल्ली पुलिस की टीम, श्री राधे शर्मा जी (SHO, वसंत कुंज), आयानगर की RWA, अनेक NGO तथा विभिन्न विद्यालयों के बच्चे सम्मिलित हुए और सामूहिक रूप से पौधरोपण किया। विशेष रूप से मदर मेरी सीनियर सेकेंडरी पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या श्रीमती रितु माथुर और मेरे नेतृत्व में विद्यार्थियों ने इस अभियान में उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान दिलखुश मीना सर (IAS) ने बच्चों से सीधे संवाद कर उन्हें अधिक से अधिक पौधे लगाने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनने के लिए प्रेरित किया। साथ ही बच्चों को आगामी अर्ध...