दूरदर्शन के स्वर्णिम दौर की यादें
दूरदर्शन के स्वर्णिम दौर की यादें
श्री रघुनाथ सिंह (आत्मकथ्य)
(वरिष्ठ सेवानिवृत्त दूरदर्शन अधिकारी)
दाएं श्री रघुनाथ सिंह जी
15 सितंबर 2025 का दिन मेरे लिए विशेष रहा। दूरदर्शन का 66वाँ स्थापना दिवस नई दिल्ली में संविधान क्लब ऑफ इंडिया में बड़े धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार श्रीमती शीला चमन द्वारा लिखित पुस्तक “दूरदर्शन डायरीज़: टेलीविज़न का स्वर्ण युग” का विमोचन हुआ। कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली स्टडी ग्रुप ने ओम बुक्स इंटरनेशनल के सहयोग से किया और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पूर्व उपमंत्री श्री गुलाम नबी आज़ाद ने पुस्तक का अनावरण किया।
यह पुस्तक पढ़ते समय मुझे अपने उन दिनों की याद आ गई जब दूरदर्शन की टीम ने सीमित संसाधनों के बावजूद समाज के प्रत्येक वर्ग तक उपयोगी कार्यक्रम पहुँचाने का संकल्प लिया था। विशेष रूप से कृषि दर्शन और अन्य कृषि कार्यक्रमों के संचालन का मुझे सौभाग्य मिला। हमारे प्रयासों का लक्ष्य हमेशा यह रहा कि किसान भाइयों तक वैज्ञानिक जानकारी, नई तकनीकें, मौसम की जानकारी और बाजार से जुड़ी सलाह सहज भाषा में पहुँचाई जाए।
इन कार्यक्रमों ने न केवल किसानों को लाभ पहुँचाया, बल्कि संबंधित विज्ञापनों के माध्यम से दूरदर्शन को आर्थिक मजबूती भी प्रदान की। यह देखकर संतोष होता है कि हमारी मेहनत से सार्वजनिक सेवा और आर्थिक स्थिरता दोनों का संतुलन संभव हुआ।
पुस्तक में जिस तरह दूरदर्शन के जनहितकारी योगदान का उल्लेख है, वह मेरे लिए गर्व का विषय है। यह केवल प्रसारण का माध्यम नहीं, बल्कि शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, संस्कृति और समाज निर्माण का एक सशक्त मंच रहा है।
आज जब पीछे मुड़कर देखता हूँ तो लगता है कि उस दौर की प्रतिबद्धता और समर्पण ने ही दूरदर्शन को जन-जन तक पहुँचाया। मैं यह विश्वास व्यक्त करता हूँ कि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस विरासत से प्रेरणा लेंगी और समाज की सेवा में अपनी भूमिका निभाएँगी।







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