✉️ पाती अपनों को - एक अनूठी मुहिम
✉️ पाती अपनों को
एक अनूठी मुहिम
डॉ. सूरज सिंह नेगी
संयोजक, पाती अपनों को मुहिम
अवसर: शिक्षक दिवस, 5 सितंबर 2025
मंच: गूगल मीट
सात वर्षों की यात्रा
* पाती अपनों को की शुरुआत 5 सितंबर 2018 को हुई।
* पत्र लेखन को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया गया।
* आज यह पहल वटवृक्ष की तरह फैल चुकी है, क्योंकि इसमें -
आप सबका सहयोग, विश्वास और अपनापन है।
पाती क्यों?
* यह महज़ पत्र लिखने की प्रतियोगिता नहीं है।
* इसमें छिपा उद्देश्य है:
* संवेदनाओं को सहेजना,
* रिश्तों की अहमियत समझना,
* नई पीढ़ी को संस्कार देना।
* चयनित पत्रों को पुस्तक का रूप दिया जाता है। अब तक पन्द्रह पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, सोलहवीं और सत्रहवीं प्रकाशनाधीन हैं।
सहयोग और आभार
* पत्र लेखक: जिन्होंने अपनी भावनाओं से पाती लिखीं।
* निर्णायक: जिन्होंने निष्पक्ष मूल्यांकन किया।
* संस्थान व व्यक्ति: जिनके सहयोग से पुस्तकें छप पाईं।
* गुरुजन व परिजन: जिन्होंने बच्चों को प्रेरित किया।
* मीडिया, डाक विभाग व समीक्षक: जिन्होंने संदेश को प्रसारित किया।
विशेष स्मरण
* चन्द्र मोहन उपाध्याय सर (मार्गदर्शक),
* स्व. देवदत्त शर्मा सर और स्व. अमीर अहमद सुमन सर (प्रेरणास्रोत),
* अन्य दिवंगत पाती सदस्य (श्रद्धांजलि)।
परिवार और व्यक्तिगत सहयोग
* डॉ. नेगी ने अपने परिवार – मीना जी, तन्मय और शिवांग – का आभार जताया।
* मीना जी ने इस मुहिम को ऊर्जा और दिशा दी।
उपलब्धियाँ
* साहित्यकारों और विश्वविद्यालयों में पाती पर शोध।
* डॉ. कृष्णा रावत जी द्वारा पाती आधारित दो नई पुस्तकों का संपादन।
* सलिला संस्थान, सलूंबर एवं जनार्दन राय विद्यापीठ, उदयपुर द्वारा पाती मुहिम को विशिष्ट सम्मान।
* सोशल मीडिया पर निरंतर पत्र साझा कर समाज को जोड़ना।
चुनौतियाँ और भविष्य
* आगे की राह आसान नहीं, लेकिन प्रेरणादायक है।
* पत्र लेखन को साहित्य का हिस्सा मानने पर प्रश्न उठते हैं, पर यह कार्य समाज के लिए अनमोल है।
* आने वाली पीढ़ी जब पुस्तकों में यह पत्र देखेगी तो रिश्तों की अहमियत समझेगी।
नई पाती का विषय
* आठवें वर्ष का विषय (स्कूली बच्चों हेतु)
🌳 पौधे लगायें, वृक्ष बचायें, विचार बढ़ायें 🌳
* सुधीजन हेतु नया विषय 14 सितंबर (हिन्दी दिवस) पर घोषित होगा।
समूह की विशेषता
* पाती अपनों को का पटल सात वर्षों से अनुशासित और मर्यादित रहा है।
* इसमें राजनीति, धर्म आदि पर विवाद नहीं होते।
* यहां भावनाओं और रिश्तों का सम्मान होता है – जो खून के रिश्तों से भी गहरे हैं।
निष्कर्ष
पाती अपनों को केवल पत्र लेखन की प्रतियोगिता नहीं, बल्कि संवेदनाओं को पुनर्जीवित करने का राष्ट्रीय अभियान है।
यह रिश्तों की मजबूती, सामाजिक सरोकार और भावी पीढ़ी को संस्कार देने का साहित्यिक मिशन है।
हमारी ताकत हैं हमारे ये सहभागी (देखें)








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