आत्महत्या रोकथाम पर कार्यशाला

आत्महत्या रोकथाम पर कार्यशाला  

श्री प्रवेन्द्र दहिया  (चेयरमैन – मेरा वजूद फाउंडेशन) 

का वक्तव्य (स्व-व्याख्यात्मक नोट)

“आत्महत्या एक गंभीर समस्या है, जो किसी भी परिवार और समाज को गहराई से प्रभावित कर सकती है। हम सभी किसी न किसी परिवार का हिस्सा हैं – कोई किसी का बेटा है, कोई बेटी है, कोई पिता है, कोई माँ है। ऐसे में तनाव, संघर्ष और मानसिक दबाव जीवन का हिस्सा बनते हैं। परंतु यह जरूरी है कि हम कठिन समय में अपनी सोच को सकारात्मक बनाए रखें और अपने मन की बात अपने साथी, मित्र, माता-पिता या किसी भरोसेमंद व्यक्ति से साझा करें।

मनोविज्ञान विशेषज्ञ डॉ. ममता अग्रवाल ने कार्यशाला में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि आत्महत्या जैसे विचार समस्याओं का समाधान नहीं हैं। छात्र जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाकर, नकारात्मक लोगों से दूरी बनाकर, आशावादी सोच के साथ चुनौतियों का सामना करना चाहिए। संघर्ष और कठिनाइयाँ जीवन का हिस्सा हैं, परंतु धैर्य और विवेक से उन्हें पार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह समय है जब मेहनत करके हम अपने लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं।

डॉ. ममता अग्रवाल के अनुसार, आत्महत्या की प्रवृत्ति से बचने के लिए जरूरी है कि हम मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करें, अपने विचार साझा करें और जरूरत पड़ने पर मदद लें। इससे हम “ट्रिगर टाइम” यानी तनाव की चरम स्थिति में लिए जाने वाले गलत निर्णयों से बच सकते हैं और अपने जीवन की रक्षा कर सकते हैं।




विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस की थीम “क्रिया द्वारा आशा का निर्माण” इस दिशा में एक सकारात्मक संदेश देती है। हमें एक-दूसरे का सहारा बनकर आशा जगानी है, मदद मांगने की संस्कृति को बढ़ावा देना है और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर खुलकर संवाद करना है।

मैं विद्यार्थियों और समाज के सभी लोगों से अपील करता हूँ कि कठिन समय में हिम्मत न हारें, अपनी भावनाएँ साझा करें और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें। हम सब मिलकर जागरूकता फैलाएँ और जीवन की रक्षा करें।”

सूचना स्रोत

 

पाठ्य उन्नयन और विस्तार 

 

प्रस्तुति




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