शिक्षक इकराम सिंह जी का प्रेरक संबोधन:

 इकराम सिंह जी का प्रेरक संबोधन

“भाइयो और बहनो! 

आज मैं आपको एक ऐसी वास्तविक कहानी सुनाने जा रह हूँ जो सिर्फ एक छात्रा की सफलता नहीं, बल्कि संकल्प, तपस्या और त्याग की मिसाल है। अमरोहा जिले के सिबोरा गांव की बेटी नेहा पंवार ने यह साबित कर दिया है कि अगर मन में जिद हो, लक्ष्य स्पष्ट हो और परिवार साथ दे तो तारे तोड़ लाने जैसे कठिन से कठिन प्रयास भी संभव हैं।

नेहा ने अपने माता‑पिता के सपनों को साकार करने के लिए बचपन से ही परिश्रम किया। उसकी माँ एक साधारण गृहिणी हैं, जिन्होंने अपने छोटे‑छोटे सुख त्याग कर बेटी को शिक्षित करने में अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। उसके पिता दुष्यंत कुमार, जो सीमा पर अपनी जान जोखिम में डालकर देश की सेवा कर रहे हैं—98 बटालियन कुपवाड़ा में NCO के पद पर कार्यरत—ने परिवार के सुख‑सुविधाओं को पीछे छोड़ अपने कर्तव्य को प्राथमिकता दी, ताकि बेटी का भविष्य उज्ज्वल हो सके। उन्होंने कभी सुविधा, कभी आराम, कभी अकेलेपन को अपनी राह में रोड़ा नहीं बनने दिया। उनके त्याग ने नेहा के सपनों को ताकत दी।

नेहा ने गुरुकुल चोटीपुरा में कक्षा पाँच से लेकर परास्नातक तक शिक्षा ग्रहण की। न केवल पढ़ाई में उत्कृष्ट रही, बल्कि राष्ट्र सेवा में भी पीछे नहीं रही। गणतंत्र दिवस 2024 की परेड में NCC टीम की सदस्य बनकर उसने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। आज वही नेहा भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद् (ICCR) के माध्यम से शारजाह (यूएई) में सांस्कृतिक सलाहकार एवं अनुवादक के पद पर नियुक्त हुई है। छह महीने के प्रशिक्षण के बाद वह भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व करेगी और दुनिया को यह बताएगी कि भारत की बेटियाँ हर क्षेत्र में सिर ऊँचा कर सकती हैं।

यह उपलब्धि सिर्फ नेहा की नहीं, बल्कि उसके परिवार, उसके गुरुकुल और उसके गाँव की भी उपलब्धि है। उसने दिखाया है कि आर्थिक सीमाएँ, सामाजिक बंधन, कठिनाइयाँ—कुछ भी आपके हौसले से बड़ा नहीं है। जब माता‑पिता अपने आराम को छोड़ बच्चों के लिए आदर्श बनते हैं, तो बच्चों में असंभव को संभव करने की ताकत आती है।

मैं आप सबसे कहता हूँ—अपने सपनों को छोटा मत कीजिए। ऐसे प्रयास कीजिए कि तारे तोड़ लाना भी आपके लिए आसान लगे। अपने परिवार के लिए आदर्श बनिए। त्याग कीजिए, परिश्रम कीजिए, और अपने गाँव, अपने समाज, अपने देश का नाम रोशन कीजिए। नेहा पंवार ने दिखा दिया है कि सही दिशा में किया गया प्रयास जीवन बदल देता है। आप भी आगे आइए, अपने संघर्ष को ताकत बनाइए और दुनिया को दिखाइए कि भारत की संतानों में कैसी जिजीविषा और सामर्थ्य है।

चलिए, हम सब मिलकर संकल्प लें—अपने परिवार को आदर्श बनाएँगे, अपने सपनों के लिए तारे तोड़ लाने जैसे प्रयास करेंगे और अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगे!”

रचनाकार

               श्री इकराम सिंह जी 
पाठ्य उन्नयन व विस्तार 
 

प्रस्तुति



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