आत्मविवरणात्मक आभार : शब्दों की मुस्कान
आत्मविवरणात्मक आभार : शब्दों की मुस्कान (लेखिका श्रीमती कविता अग्रवाल की ओर से) "आज का दिन मेरे लिए केवल एक साहित्यिक पड़ाव नहीं, बल्कि मेरे जीवन की अनमोल स्मृति बन गया है। शब्दों की मुस्कान का विमोचन राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर के सहयोग से संभव हुआ। इसके लिए मैं अकादमी के सचिव आदरणीय डॉ. बसंत सिंह सोलंकी जी की विशेष आभारी हूँ, जिनके प्रोत्साहन ने मेरी रचनात्मक यात्रा को नई ऊर्जा दी। मुख्य अतिथि आदरणीय डॉ. इंदुशेखर तत्पुरुष जी के स्नेहिल और गहन विचार मेरे लिए मार्गदर्शन हैं। उनके आशीर्वचन ने मेरी लेखनी में और विश्वास जगाया। विशिष्ट अतिथि श्री रास बिहारी गौड़ जी का स्नेहिल स्वागत वचन और गहरी टिप्पणी मेरे लिए प्रेरणा है। उनके शब्दों ने मुझे यह अनुभव कराया कि स्त्री लेखन की राह भले कठिन हो, परंतु संवेदना और साहस इसे अर्थपूर्ण बना देते हैं। डॉ. मधु खंडेलवाल जी ने जिस स्नेह के साथ मेरी रचनाओं को जीवन के विभिन्न रंगों की अभिव्यक्ति कहा और मुझे ‘काव्यम’ नाम से सुशोभित किया—यह मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है। अब यह नाम मेरी पहचान का अभिन्न हिस्सा रहेगा। मैं अपने पिता श्री पी. एम. अग्...