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Showing posts from January, 2026

गणतंत्र दिवस पर भाई धम्मू के भाव (संशोधित)

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हमारे मध्य के हमारे भाई भी कई अवसरों पर इतना आकर्षक रच देते हैं कि उसको सब ही पढ़ सकें ऐसा करने का प्रयास अवश्य ही करना चाहिए। 🙏🌹🌹❤️❤️🙏 शुभ प्रभात 🙏🌹❤️🙏 आपका दिन मंगलमय हो। ईश्वर—जो इस कायनात के रखवाले हैं—आपकी हर मंगलकामना पूर्ण करें। जो हर दुःख और दरिद्रता को दूर करने वाले हैं, जो न्याय, ईमान और सत्य को सदैव विजयी बनाते हैं, जो करुणा और दया के सागर हैं। जिनकी कोमलता के सामने कमल पुष्प की पंखुड़ियाँ भी नतमस्तक हो जाएँ, जो हर संतान की मुरादें पूरी करें और प्रेम के गीत गुनगुनाते रहें—ऐसे परमात्मा सबका भला करें। 🌹🌹 🙏🌹🌹❤️❤️🙏 आज का विचार सभी भाई-बहनों एवं देशवासियों को गणतंत्र दिवस के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ। आज यह बताना मेरा कर्तव्य है कि गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है। 26 नवंबर 1949 को भारतीय संविधान पूर्ण हुआ, लेकिन इसे लागू करने के लिए 26 जनवरी 1950 की तिथि चुनी गई। इसका कारण यह था कि आज से लगभग 20 वर्ष पूर्व, 1929 में लाहौर कांग्रेस अधिवेशन में कांग्रेस अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू ने दोयम दर्जे की स्वतंत्रता को अस्वीकार करते हुए पूर्ण स्वराज की घ...

आत्मकथ्य — संगीता जड़िया

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  आत्मकथ्य — संगीता जड़िया मेरा नाम संगीता जड़िया है। मेरा जन्म 28 नवम्बर 1977 को हुआ। मैं विश्व-विख्यात चित्रकार श्री बद्री लाल जी की सुपोत्री हूँ। कला, साधना और सेवा—ये तीनों धाराएँ मेरे जीवन में स्वाभाविक रूप से प्रवाहित होती रही हैं। शिक्षा और कलात्मक प्रतिभा मेरी प्रारंभिक शिक्षा के दौरान ही पढ़ाई के साथ-साथ खेल और कला में मेरी विशेष रुचि रही। मैंने नेशनल टेबल टेनिस प्रतियोगिता में भाग लिया। पारिवारिक वातावरण कला-प्रधान होने के कारण चित्रकला के साथ-साथ गोटा-पत्ती , राजस्थानी मांडणा , मेहंदी और कशीदाकारी जैसी पारंपरिक कलाओं में दक्षता प्राप्त की। इनमें मेहंदी और मांडणा मेरे लिए विशेष रूप से प्रिय रहे। शैक्षणिक रूप से मैं बचपन से ही मेधावी रही और गणित विषय में एम.एससी. की डिग्री प्राप्त की। इसके अतिरिक्त मैंने एक वर्षीय कंप्यूटर डिप्लोमा भी पूर्ण किया। आध्यात्मिक यात्रा और जीवन दृष्टि आर्य समाज से जुड़ाव के कारण बचपन से ही वैदिक हवन-संध्या और वैदिक साहित्य से मेरा गहरा परिचय रहा। इस साहित्य ने मेरे चिंतन और जीवन दृष्टि को दिशा दी। मेरे दादाजी को हस्तरेखा विज्ञान का वि...

डॉ. मधु खंडेलवाल से विशेष संवाद

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भूमिका समकालीन हिंदी साहित्य जब सामाजिक चेतना, वैचारिक स्पष्टता और संवेदनात्मक गहराई के साथ राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनता है, तब वह केवल साहित्यिक उपलब्धि नहीं, बल्कि सांस्कृतिक उत्तरदायित्व का निर्वहन भी करता है। ऐसी ही एक महत्वपूर्ण साहित्यिक उपस्थिति हैं डॉ. मधु खंडेलवाल, जिनका साक्षात्कार राष्ट्रीय चैनल डीडी दूरदर्शन पर प्रसारित होने जा रहा है। यह संवाद उनके रचनात्मक अनुभवों, साहित्यिक दृष्टि, डिजिटल युग की चुनौतियों और साहित्य के सामाजिक उद्देश्य पर केंद्रित है। प्रस्तुत है उसी भावभूमि पर आधारित एक सुसंगठित साक्षात्कार, जो साहित्य, समाज और समय के अंतर्संबंधों को रेखांकित करता है। डॉ. मधु खंडेलवाल से विशेष संवाद बातचीत प्रश्न १. डीडी दूरदर्शन जैसे राष्ट्रीय मंच पर आपका साक्षात्कार प्रसारित होना आपके लिए क्या मायने रखता है? उत्तर : "यह मेरे लिए व्यक्तिगत उपलब्धि से अधिक हिंदी साहित्य की सामूहिक स्वीकृति का क्षण है। दूरदर्शन एक ऐसा मंच है जिसने दशकों से जनमानस को दिशा दी है। इस मंच पर साहित्यिक संवाद का प्रसारण यह सिद्ध करता है कि साहित्य आज भी राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण ह...

Self-Description from Dr. Roshanlal Chhokar

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Self-Description   Dr. Roshanlal Chhokar I had the privilege of being associated as a distinguished guest with the Gurjar Parivar Milan evam Pratibha Samman Samaroh, a grand and inspiring social gathering organized by the Akhil Bhartiya Gurjar Mahasabha, Vasundhara (Ghaziabad, Uttar Pradesh) on 23 March 2025 at Shri Vijay Singh Pathik Park, Sector-5, Vasundhara. The primary objective of this meaningful programme was to recognize and honour meritorious children of the Gurjar community who demonstrated outstanding performance in academics during the year 2025, as well as those who secured prestigious appointments in government and non-government services. Such recognition, through certificates and mementos, plays a vital role in nurturing confidence, self-belief, and aspiration among young minds. It was heartening to witness the enthusiastic participation of Gurjar families from across the Vasundhara region. The presence of respected personalities, including Professor Dr. Yashveer Ch...

आत्मकथ्य — डॉ. उपदेश वर्मा

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आत्मकथ्य — डॉ. उपदेश वर्मा मकर संक्रांति का दिन मेरे लिए केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और सामाजिक उत्तरदायित्व को फिर से स्मरण करने का अवसर बन गया। मेरठ के परतापुर क्षेत्र के ग्राम छज्जूपुर में, नींव संस्था द्वारा संचालित नि:शुल्क कक्षाओं में जब मैंने जरूरतमंद बच्चों को कपड़े और जूते वितरित करने में योगदान दिया, तो लगा कि सेवा वास्तव में तभी सार्थक होती है जब वह किसी के जीवन में सम्मान और आत्मविश्वास जोड़ दे। इन बच्चों की आँखों में चमक थी—केवल नई वस्तुओं की खुशी नहीं, बल्कि यह भरोसा था कि समाज उन्हें देख रहा है, समझ रहा है और उनके साथ खड़ा है। बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मन को गहराई से छुआ। उनमें छिपी प्रतिभा और सीखने की ललक ने मुझे फिर स्मरण कराया कि सही अवसर और स्नेह मिले, तो हर बच्चा असाधारण बन सकता है। मैंने अपने संबोधन में यह साझा किया कि मकर संक्रांति केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत नहीं है। यह अंधकार से प्रकाश की ओर, अज्ञान से ज्ञान की ओर और स्वार्थ से सेवा की ओर बढ़ने का संदेश देती है। जब समाज का प्रत्येक सक्षम व्यक्ति वंचित बच्चों की शिक्षा और उनकी मूलभूत ...