मदर्स डे पर माँ का पत्र
प्रिय पुत्र/पुत्री, सप्रेम आशीर्वाद। जब तुम यह पत्र पढ़ रहे होगे, शायद व्यस्तता की कोई नई वजह तुम्हारे सामने होगी—ऑफिस की कोई डेडलाइन, बच्चों की ज़रूरतें, या किसी और ज़िम्मेदारी का दबाव। मुझको तुमसे कोई शिकायत नहीं है, और न ही कोई अपेक्षा जो तुम्हारे लिए बोझ बन जाए। मैं जानती हूं, समय बदल गया है। मैं यह भी जानटी हूं कि तुम्हारी ज़िंदगी की दौड़ थमने वाली नहीं। लेकिन इस पत्र के माध्यम से मैं तुमसे कुछ नहीं मांग रही—न समय, न सुविधा, न कोई खास व्यवस्था। मैं बस एक छोटी-सी सादगी भरी गुज़ारिश करना चाहती हूँ… "मात-पिता के लिए इतना तो शर्म रखना, जब भी मिलो उनसे, लहजा नर्म रखना।" हमारी ज़रूरतें कभी बहुत बड़ी नहीं रहीं। आज भी वही हैं—एक दो मीठे बोल, एक स्नेहभरी मुस्कान, और एक ऐसा लहजा जिसमें अपनापन हो। यह लहजा ही वो पुल है जो हमें फिर से तुमसे जोड़ सकता है, जैसे बचपन में हर शब्द तुम्हारे मुंह से मिठास की तरह लगता था। मैं जानती हूँ कि ये दुनिया अब पहले जैसी नहीं रही। सब कुछ तेज़ है—फैसले, रिश्ते, और यहाँ तक कि संवाद भी। पर क्या इस तेज़ जीवन में कुछ पल के लिए अपनी आवाज़...