यात्रा वृत्तांत - शिवराज जी कुर्मी
भूमिका यह अवसर केवल एक यात्रा का नहीं, बल्कि दो शिक्षकों, दो साहित्य-साधकों और दो संवेदनशील दृष्टियों के आत्मीय समागम का था। पाती अपनों की जैसी अनूठी साहित्यिक मुहिम से जुड़े वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षाविद सेवानिवृत्त श्री शिवराज जी कुर्मी का बनेठा आगमन, स्मृतियों, इतिहास और वर्तमान के बीच एक सजीव सेतु बन गया। युवा कवि एवं शिक्षक श्री हंसराज हंस द्वारा स्थानीय ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक धरोहरों का तथ्यात्मक परिचय, उनके निहितार्थों का विवेचन, तथा स्वरचित पुस्तक भेंट कर किया गया सम्मान—इस यात्रा को साधारण भ्रमण से ऊपर उठाकर ज्ञान-विनिमय, भाव-संवाद और सांस्कृतिक उत्तराधिकार की जीवंत अभिव्यक्ति बना देता है। विद्यालय परिसर में आत्मीय स्वागत के साथ यह समूचा घटनाक्रम लेखन की उस परंपरा को सुदृढ़ करता है, जिसमें यात्रा अनुभव नहीं, बल्कि विचार, संवेदना और जिम्मेदारी का विस्तार बन जाती है। यात्रा वृत्तांत-शिवराज जी कुर्मी वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्रशासनिक अधिकारी डॉ सूरज सिंह नेगी साहब की अनूठी मुहिम, पाती अपनों को, से पुस्तक, लिख दूं पाती यादों के गलियारों से, लिखित पत्र संख्या 88 जो यु...