होली नैतिकता के साथ
होली भारतीय संस्कृति का एक अनुपम पर्व है, जो मात्र रंगों और उल्लास का उत्सव न होकर जीवन के गहन दार्शनिक सत्यों को प्रतिबिंबित करता है।
प्राचीन काल से चली आ रही इस परंपरा की जड़ें वेदों और पुराणों में निहित हैं। प्रह्लाद की कथा होलिका दहन के माध्यम से अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक बनती है।
यह त्योहार सामाजिक समरसता का संदेश देता है, जहाँ जाति-धर्म की दूरियाँ मिट जाती हैं। सभी एक-दूसरे पर रंग डालकर प्रेम का आदान-प्रदान करते हैं। ब्रज की होली राधा-कृष्ण की लीला से जुड़कर भक्ति का रूप ले लेती है जब कि आध्यात्मिक दृष्टि से यह अहंकार के दहन और आत्म-जागरण का प्रतीक है।
इस होली पर संकल्प लें कि हमारा जीवन रंगीन तो हो, किंतु नैतिकता से ओतप्रोत रहे और अपनों के संग बिताए ये पल सदा के लिए स्मृतियों में अंकित हो जाएं।
आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ — रंगों से भरा हो आपका जीवन, प्रेम से ओतप्रोत हो हर क्षण!
रचनाकार
श्री संतोष कुमार उपाध्याय
कल्पना



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