आत्ममंथन और सामाजिक उत्तरदायित्व का बोध कराने वाली अनुभूतियां

भूमिका

आज का क्षण दहेज़ एक अभिशाप निवारण समिति के कार्यक्रम के प्रतिभागियों के लिए आत्ममंथन और सामाजिक उत्तरदायित्व का बोध कराने वाला रहा। सामुदायिक केंद्र, सेक्टर-39, नोएडा में आयोजित दहेज़ एक अभिशाप निवारण समिति के पंचम वार्षिकोत्सव में सम्मिलित होकर जब प्रतिभागियों ने बिना दहेज़ के विवाह करने वाले नवविवाहित युगलों का सम्मान होते देखा, तो उनका मन गर्व और आशा से भर उठा। यह आयोजन केवल सम्मान समारोह नहीं था, बल्कि समाज की चेतना को झकझोरने वाला वह संदेश था, जो बताता है कि परिवर्तन संभव है—बस साहस, संकल्प और सही दिशा की आवश्यकता होती है। इसी भावभूमि पर कुछ प्रतिभागियों ने अपने मन की बात, अनुभव और दृष्टि निम्नवत साझा की।

समिति अध्यक्ष निर्मल जी का आत्मकथ्य

दहेज़ उन्मूलन के पावन संकल्प को समर्पित इस पंचम वार्षिकोत्सव के अवसर पर उपस्थित होकर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने वाले सभी सम्मानित अतिथियों, मुख्य अतिथिगण, विशिष्ट आमंत्रित जन, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, नवविवाहित युगल, मातृशक्ति, युवा साथियों एवं मीडिया बंधुओं के प्रति मैं समिति की ओर से हृदय की गहराइयों से आभार एवं धन्यवाद व्यक्त करती हूँ।

आप सभी की गरिमामयी उपस्थिति, स्नेहपूर्ण सहभागिता और उत्साहवर्धक सहयोग ने इस आयोजन को केवल एक कार्यक्रम नहीं रहने दिया, बल्कि उसे एक सशक्त सामाजिक संदेश में परिवर्तित कर दिया। दहेज़ जैसी अमानवीय और कुप्रथागत व्यवस्था के विरुद्ध खड़े होने का जो साहस आप सभी ने दिखाया है, वही हमारे संकल्प की वास्तविक शक्ति है।

यह आयोजन उन परिवारों और नवयुगलों के सम्मान का उत्सव है, जिन्होंने सामाजिक दबावों को पीछे छोड़ते हुए बिना दहेज़ के विवाह कर समाज को नई दिशा दी। ऐसे उदाहरण हमारे लिए प्रेरणा हैं और यही हमारी समिति की सबसे बड़ी उपलब्धि भी है। आपके समर्थन और विश्वास से हमें यह अनुभूति हुई है कि हमारा संघर्ष अकेला नहीं है—समाज हमारे साथ है।

मैं समिति के प्रत्येक सदस्य, स्वयंसेवक और सहयोगी का भी विशेष रूप से धन्यवाद करती हूँ, जिनके अथक परिश्रम, समर्पण और टीम भावना से यह आयोजन सफल हो सका। आप सभी के सहयोग से हमें दहेज़ उन्मूलन के इस अभियान को और अधिक व्यापक एवं प्रभावी बनाने की नई ऊर्जा और दृढ़ संकल्प मिला है। 

भविष्य में भी आपके मार्गदर्शन, समर्थन और सक्रिय सहभागिता की अपेक्षा के साथ, मैं आप सभी को पुनः कोटि-कोटि धन्यवाद अर्पित करती हूँ। आइए, हम सब मिलकर एक ऐसा समाज रचें जहाँ विवाह सम्मान, समानता और संवेदना का उत्सव हो—लेन-देन का नहीं। 🙏

मुख्य अतिथि सुनीता बैंसला जी का संबोधन

अपने सारगर्भित उद्बोधन में नवविवाहित युगलों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि समाज अब सकारात्मक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। दहेज़ जैसे सामाजिक अभिशाप पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने सर्वप्रथम अपना व्यक्तिगत उदाहरण साझा किया। उन्होंने बताया कि वर्ष **1991** में उनका विवाह मात्र **ग्यारह बारातियों** के साथ, बिना किसी दहेज़ और बिना किसी तामझाम के, राजस्थान के **करौली जिले के अपने गांव** में संपन्न हुआ था।

उन्होंने स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि आज यहां उपस्थित सभी नवविवाहित युगलों का वे हृदय से अभिनन्दन करती हैं, क्योंकि **एनसीआर क्षेत्र में साधारण एवं दहेज़-मुक्त विवाहों का आयोजन** इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि **श्रीमती निर्मल डेढ़ा जी, श्री वीर सिंह डेढ़ा, श्री महेंद्र सिंह राठी जी** एवं उनकी पूरी टीम के संयुक्त प्रयास सार्थक एवं प्रभावी सिद्ध हो रहे हैं। उन्होंने इन सभी के मेधावी, समाजोपयोगी कार्यों की मुक्तकंठ से सराहना की।

अपने उद्बोधन के अंत में बहनजी सुनीता बैंसला जी ने आह्वान किया कि इस पहल को अब केवल आयोजन तक सीमित न रखते हुए **एक जनआंदोलन का रूप दिया जाए**। उन्होंने सुझाव दिया कि गांव-गांव जाकर लोगों को प्रेरित किया जाए, ताकि साधारण कृषक परिवार भी बिना दहेज़ के, सादगीपूर्ण विवाह करने का साहस और संकल्प कर सकें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे प्रयासों से समाज में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन अवश्य आएगा।

डॉ. रोशन लाल छोकर का आत्मकथ्य

दहेज़ एक सामाजिक अभिशाप है। इसके उन्मूलन के लिए निरंतर समर्पित भाव से कार्यरत *दहेज़ एक अभिशाप निवारण समिति* के सभी सम्मानित सदस्यों के प्रति मैं हृदय से आभार और साधुवाद व्यक्त करता हूँ। समाज के भीतर जड़ जमा चुकी इस कुप्रथा के विरुद्ध संगठित होकर संघर्ष करना सरल नहीं होता, परंतु यह समिति जिस निष्ठा और साहस के साथ आगे बढ़ रही है, वह वास्तव में प्रेरणादायक है।

आज सामुदायिक केंद्र, सेक्टर-39, नोएडा में आयोजित समिति के पंचम वार्षिकोत्सव में सम्मिलित होकर मुझे अत्यंत गर्व और संतोष की अनुभूति हुई। इस अवसर पर उन नवविवाहित युगलों का भव्य स्वागत और सम्मान किया गया, जिन्होंने बिना दहेज़ के विवाह कर समाज के समक्ष एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। मेरे लिए यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का उत्सव था। यह पहल यह सिद्ध करती है कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो परंपराओं की बेड़ियाँ भी टूट सकती हैं।

इस गरिमामय कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती सुनीता बैंसला जी रहीं। समाज की व्यापक और सक्रिय भागीदारी यह संकेत देती है कि हमारा गुर्जर समाज अब सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में ठोस कदम बढ़ा रहा है। इस परिवर्तन का सबसे बड़ा श्रेय मैं हमारी युवा पीढ़ी को देता हूँ, जिसने साहस, समझ और आत्मसम्मान के साथ दहेज़ जैसी कुप्रथा को नकारा। साथ ही, उन परिवारों को भी मैं नमन करता हूँ, जिन्होंने सामाजिक दबाव से ऊपर उठकर यह साहसिक और सराहनीय निर्णय लिया—वे सभी वास्तव में बधाई के पात्र हैं।

मेरे मत में ऐसे प्रयास समाज को यह स्पष्ट संदेश देते हैं कि विवाह में दहेज़ लेना और देना—दोनों ही घृणित अपराध हैं। हमें अपने युवाओं को शिक्षित, स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाना होगा, ताकि उनके वैवाहिक जीवन में किसी भी प्रकार की सामाजिक या आर्थिक बाधा न आए। तभी हमारा पूरा गुर्जर समाज एक सशक्त, जागरूक और सकारात्मक भविष्य की ओर अग्रसर हो सकेगा।

इस पुनीत कार्य में सहयोग देने वाले समिति के सभी सदस्यों, आयोजकों और सहभागी साथियों को मैं पुनः हार्दिक अभिनंदन एवं अभिवादन करता हूँ। मेरा विश्वास है कि ऐसे निरंतर प्रयास एक दिन दहेज़ जैसी कुप्रथा को इतिहास के अंधकार में धकेल देंगे।

श्री सागर खारी की भावाभिव्यक्ति

आदरणीया निर्मल बहन जी,

दहेज़ उन्मूलन जैसे संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण सामाजिक विषय को लेकर आपकी प्रतिबद्धता, समिति के प्रति आपका आग्रह और कार्यक्रमों में आपका निरंतर सक्रिय रहना वास्तव में अनुकरणीय है। समिति के प्रत्येक आयोजन में आपका परिश्रम, आपकी निष्ठा और आपका नेतृत्व इतना प्रभावशाली है कि उसे शब्दों में बांध पाना कठिन है—वह अनुपमेय, अनिर्वचनीय और अकथनीय है।

आप केवल एक अध्यक्ष के रूप में नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक, प्रेरक और समाज को दिशा देने वाली शक्ति के रूप में कार्य कर रही हैं। आपके प्रयासों से समिति को न केवल पहचान मिली है, बल्कि समाज में विश्वास और बदलाव की उम्मीद भी जगी है।

मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि उनकी कृपा से शत-शत वर्षों तक हमें और समिति को आपका स्नेहपूर्ण मार्गदर्शन, आपका अनुभव और आपका सशक्त नेतृत्व प्राप्त होता रहे। आपके जैसे समर्पित व्यक्तित्व के साथ यह आंदोलन निश्चित रूप से अपने उद्देश्य में सफल होगा—इसमें कोई संदेह नहीं।

झलकियाँ 














































सूचना स्रोत 
डॉ रोशन लाल छोकर जी
पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति 





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