डॉ. राकेश राणा का आत्मकथ्य

 डॉ. राकेश राणा का आत्मकथ्य

विषय : शहरी महिलाओं में ऑनलाइन शॉपिंग का बढ़ता क्रेज 

स्थान : एम.एम.एच. कॉलेज, गाजियाबाद

शिक्षा को मैं हमेशा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित एक प्रक्रिया नहीं मानता, बल्कि इसे जीवन के वास्तविक अनुभवों से जुड़ी एक सतत यात्रा के रूप में देखता हूँ। मेरे लिए कक्षा केवल एक प्रारंभिक बिंदु है, जबकि समाज स्वयं एक विस्तृत प्रयोगशाला है, जहाँ हर दिन कुछ नया सीखने और समझने का अवसर मिलता है।

हाल ही में शहरी महिलाओं में ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ता क्रेज विषय पर विद्यार्थियों के साथ किया गया फील्ड सर्वेक्षण इसी सोच का परिणाम है। इस विषय के चयन के पीछे यह समझ थी कि आज का समाज तकनीकी परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, और यह परिवर्तन विशेष रूप से महिलाओं के जीवन को नई दिशा दे रहा है। जब मैंने समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष श्रीमती रेखा शर्मा के विचार सुने, तो यह और स्पष्ट हुआ कि ऑनलाइन शॉपिंग केवल एक उपभोक्ता प्रवृत्ति नहीं, बल्कि बदलती जीवनशैली, समय की मांग और तकनीकी सशक्तिकरण का प्रतीक है।

इसी समझ को विद्यार्थियों तक पहुँचाने के लिए मैंने उन्हें समूहों में संगठित कर फील्ड में भेजने का निर्णय लिया। मेरा उद्देश्य यह था कि वे केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि स्वयं लोगों से मिलकर, उनकी जीवनशैली, सोच और व्यवहार को समझें। जब विद्यार्थी घर-घर जाकर, बाजारों में जाकर, महिलाओं से संवाद करते हैं, तब वे यह अनुभव करते हैं कि समाज वास्तव में कैसे बदल रहा है।

इस प्रक्रिया में मैंने यह सुनिश्चित किया कि प्रत्येक विद्यार्थी केवल दर्शक न बने, बल्कि सक्रिय भागीदार हो। छोटे-छोटे समूहों में कार्य करने से उनमें टीमवर्क की भावना विकसित हुई। किसी ने प्रश्न पूछने की जिम्मेदारी निभाई, तो किसी ने उत्तरों को दर्ज किया, और किसी ने अवलोकन किया। इस सामूहिक प्रयास ने उन्हें यह सिखाया कि ज्ञान का निर्माण अकेले नहीं, बल्कि सहयोग से होता है।

फील्ड में जाने से पहले उन्हें सर्वेक्षण की तकनीक, प्रश्नावली निर्माण और संवाद के शिष्ट तरीकों का प्रशिक्षण दिया गया। मैंने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि किसी भी उत्तरदाता की निजता और सम्मान सर्वोपरि है। निष्पक्षता और संवेदनशीलता—ये दो गुण मैंने हर विद्यार्थी में विकसित होते देखे, जो मेरे लिए इस पूरी प्रक्रिया की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

इस सर्वेक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने यह समझा कि ऑनलाइन शॉपिंग क्यों महिलाओं के बीच लोकप्रिय हो रही है—समय की बचत, सुविधा, विकल्पों की विविधता और डिजिटल भुगतान की सरलता इसके प्रमुख कारण हैं। वहीं, उन्होंने इसके नकारात्मक पक्षों को भी जाना—अनावश्यक खर्च, गुणवत्ता संबंधी समस्याएँ और कभी-कभी होने वाली धोखाधड़ी। यह संतुलित समझ ही वास्तविक शिक्षा का आधार है।

मेरे लिए सबसे संतोषजनक क्षण वह था, जब विद्यार्थियों ने अपने अनुभवों को रिपोर्ट के रूप में प्रस्तुत किया। उनके विश्लेषण में परिपक्वता, उनके निष्कर्षों में गहराई और उनके विचारों में संवेदनशीलता स्पष्ट दिखाई दी। इससे यह विश्वास और मजबूत हुआ कि जब शिक्षा को अनुभव से जोड़ा जाता है, तब उसका प्रभाव कहीं अधिक व्यापक और स्थायी होता है।

मैं मानता हूँ कि इस प्रकार के सर्वेक्षण केवल शैक्षणिक गतिविधियाँ नहीं हैं, बल्कि यह विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इससे उनमें आत्मविश्वास, संवाद कौशल और समाज को समझने की दृष्टि विकसित होती है।

अंततः, मैं अपने विद्यार्थियों से हमेशा यही कहता हूँ—

“सीखना केवल सुनना या पढ़ना नहीं है, बल्कि देखना, समझना और महसूस करना है। जब आप समाज से जुड़ते हैं, तभी आपकी शिक्षा वास्तव में सार्थक बनती है।”

यही मेरा विश्वास है, यही मेरी शिक्षण-यात्रा का उद्देश्य भी।

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प्रस्तुति







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