#ऐसी कोई कहानी लिख#

 #ऐसी कोई कहानी लिख#

भूमिका

यह कविता केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि एक जागृत चेतना की पुकार है—एक ऐसी संवेदनशील आत्मा की अभिव्यक्ति, जो लेखनी को मात्र अभिव्यक्ति का साधन नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन का माध्यम मानती है। कवि बाबू लाल “नायक” जी ने इस रचना के माध्यम से लेखन की उस जिम्मेदारी को रेखांकित किया है, जो केवल भावनाओं तक सीमित न रहकर सत्य, न्याय, प्रेम, सद्भाव और मानवता के व्यापक आयामों को स्पर्श करती है।

“ऐसी कोई कहानी लिख” एक प्रेरणात्मक उद्घोष है—जो हर लेखक, विचारक और संवेदनशील व्यक्ति को यह सोचने के लिए विवश करता है कि उसकी लेखनी का उद्देश्य क्या है। क्या वह केवल मनोरंजन का साधन है, या फिर वह समाज में व्याप्त अन्याय, असमानता और संवेदनहीनता के विरुद्ध एक सशक्त स्वर बन सकती है? इस कविता में बार-बार दोहराया गया आग्रह, एक आह्वान है—कि हम लिखें, परंतु ऐसा लिखें जो दिशा दे, जो जागरूक करे, जो मनुष्य को मनुष्य से जोड़ने का कार्य करे।



कवि ने अत्यंत सरल शब्दों में जीवन के गूढ़ तत्वों—धर्म और अधर्म, नीति और अनीति, प्रेम और प्रतिकार, संबंध और शासन—सभी को समेटते हुए लेखन के विविध आयामों को सामने रखा है। यह कविता एक प्रकार से लेखनी के लिए आचार-संहिता भी है, जिसमें संवेदना, विवेक और उत्तरदायित्व का संतुलन आवश्यक बताया गया है।

इस रचना की विशेषता यह है कि यह केवल पढ़ी जाने वाली कविता नहीं, बल्कि आत्ममंथन का माध्यम है। यह पाठक को भीतर तक झकझोरती है और उसे यह सोचने पर विवश करती है कि क्या उसकी सोच, उसकी वाणी और उसकी लेखनी वास्तव में मानवता के पक्ष में खड़ी है।

अतः यह कविता एक साधारण आग्रह नहीं, बल्कि एक सशक्त संदेश है—कि जब भी लिखें, ऐसा लिखें जो समय की कसौटी पर खरा उतरे, जो समाज को नई दिशा दे और जो मानवता के वास्तविक स्वरूप को उजागर कर सके। यही इस काव्य की आत्मा है, और यही इसकी सबसे बड़ी सार्थकता।

💖 ऐसी कोई कहानी लिख💖

💥कविता💥

लिख-लिख, इतना लिख, मन में आए भाव लिख।

विचार लिख, सत्कार लिख, सत्य लिख, न्याय लिख।

ऐसी कोई कहानी लिख!

प्रेम लिख, सदव्यवहार लिख,

     आस्था लिख, सद्भाव लिख।

           न्याय लिख, मंगल लिख,

                अन्याय का, प्रतिकार लिख।

                #ऐसी कोई कहानी लिख#

रीति लिख, नीति लिख,

      अनीति का प्रतिरोध लिख।

           संवेदना और मन के उदगार लिख,

                सोचकर लिख, पहचान लिख।

               #ऐसी कोई कहानी लिख#

रिश्तों की, जंजीरें लिख,

     आचार लिख, विचार लिख।

           नियमों का, संचार लिख,

               परंपरा की, पहचान लिख।

              #ऐसी कोई कहानी लिख#

शासन लिख, प्रशासन लिख,

      निश-दिन, नवाचार लिख।

            संबंध और रिश्तों की, पहचान लिख,

                  नीति का, बदलाव तो लिख।

                 #ऐसी कोई कहानी लिख#

धर्म लिख अधर्म का प्रतिकार लिख,

        ख्याति लिख, परामर्श लिख।

              आवाम का, दु:ख-दर्द लिख,

                     युक्ति लिख, प्रयुक्ति लिख।

                   #ऐसी कोई कहानी लिख#

जीवन की सार्थक, सुक्ति लिख,

       सौहार्द लिख, परमार्थ लिख।

              सांप्रदायिक, सद्भाव लिख,

                    रहम लिख, संयम लिख।

                 #ऐसी कोई कहानी लिख#

सेवा का, सद्मार्ग लिख,

           मंत्र लिख, स्वतन्त्र लिख।

                 प्रतिष्ठा का, संबोधन लिख,

                       रिद्धि लिख, प्रसिद्धि लिख।

                      #ऐसी कोई कहानी लिख#

 विशिष्ट योग की, सिद्धि लिख,

         ज्ञान लिख, विज्ञान लिख।

                सृष्टि का, विस्तार लिख,

                       सहयोग लिख, वियोग लिख।

                      #ऐसी कोई कहानी लिख#

मान लिख सम्मान लिख,

      संयम का, संयोग लिख।

             लिख-लिख, मानवता लिख,

                   संगम का, साकार तो लिख।

#ऐसी कोई कहानी लिख#

रचनाकार

💖"नायक"बाबू लाल नायक❤️

पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति 






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