श्री शिवराज जी कुर्मी का आत्मकथ्य
आत्मकथ्य
मैं, शिवराज कुर्मी, साहित्य मंच टोडारायसिंह का संयोजक होने के नाते स्वयं को अत्यंत सौभाग्यशाली मानता हूँ कि मुझे मालपुरा जिला प्रशासन एवं उपवन संरक्षक टोंक के सहयोग से केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अधिकानगर में आयोजित “पंच गौरवः एक जिला, एक वनस्पति” अभियान के अंतर्गत अमलतास वनस्पति के संरक्षण, संवर्धन तथा उसके सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक एवं औषधीय महत्व पर केंद्रित जनजागरूकता कार्यशाला से जुड़ने और उसे साकार रूप देने का अवसर प्राप्त हुआ।
यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी का जीवंत प्रतिबिंब था। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां शारदे के तिलक-वंदन एवं माल्यार्पण के साथ अत्यंत गरिमामय वातावरण में हुआ, जिसने पूरे आयोजन को एक सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक आधार प्रदान किया। दादू पर्यावरण संस्थान एवं साहित्य मंच टोडारायसिंह की ओर से सभी अतिथियों का शाल एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया, जो हमारे सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि निदेशक श्री अरुण कुमार तोमर तथा विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के प्रोफेसर डॉ. सुमित नथानी की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और अधिक बढ़ाया। अध्यक्षता उपवन संरक्षक टोंक श्री वीरेन्द्र सिंह कृष्णिका ने की, जिनका स्वागत उद्बोधन अमलतास वनस्पति के परिचय और उसके बहुआयामी महत्व पर आधारित था। उनके विचारों ने स्पष्ट किया कि अमलतास केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।
मुख्य वक्ता एवं सेवानिवृत्त प्राचार्य श्री गिरधर सिंह ने अमलतास के प्रत्येक भाग—फूल, फल, छाल और पत्तियों—के उपयोग एवं महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों और आमजन को अधिकाधिक पौधारोपण करने तथा लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने के लिए प्रेरित किया। प्रोफेसर डॉ. सुमित नथानी ने आयुर्वेदिक दृष्टि से अमलतास के औषधीय गुणों को सरल और प्रभावी ढंग से समझाया, जिससे उपस्थित जनसमूह में इस वनस्पति के प्रति विशेष जागरूकता विकसित हुई।
कार्यक्रम के दौरान मदन लाल एवं नूर मोहम्मद की टीम द्वारा प्रस्तुत लघु नाटिका और कठपुतली नृत्य ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश अत्यंत प्रभावशाली ढंग से जनमानस तक पहुँचाया। सेवा भारती समिति टोडारायसिंह द्वारा “जीते भी लकड़ी, मरते भी लकड़ी, देख तमाशा लकड़ी का” विषय पर आधारित प्रस्तुति ने जीवन और प्रकृति के गहरे संबंध को संवेदनात्मक रूप से अभिव्यक्त किया। साहित्य मंच की प्रेरणा से उड़ान समूह की बालिकाओं ने अमलतास संरक्षण एवं संवर्धन पर आधारित लघु नाटिका प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया और यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण में नई पीढ़ी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मेरे लिए यह विशेष संतोष का विषय रहा कि विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु निबंध लेखन, पोस्टर मेकिंग एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। निबंध लेखन प्रतियोगिता में टोडारायसिंह की सरोज कुमारी बैरवा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में डिग्गी स्थित राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, टोडारायसिंह के दिनेश बुनकर ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान अर्जित किया। विजेताओं को प्रमाण पत्र, नकद पुरस्कार एवं जल की बोतल भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे उनमें उत्साह और प्रेरणा का संचार हुआ।
मुख्य अतिथि श्री अरुण कुमार तोमर ने अपने संस्थान में किए जा रहे पौधारोपण कार्यों की जानकारी साझा करते हुए अन्य संस्थाओं द्वारा लगाए गए पौधों की देखभाल के प्रति भी अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। सेवानिवृत्त उपवन संरक्षक एवं दादू पर्यावरण संस्थान के अध्यक्ष श्री देवेन्द्र कुमार भारद्वाज की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को एक सुदृढ़ मार्गदर्शन प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन कवि श्री प्रदीप पंवार (टोंक) ने अत्यंत प्रभावशाली एवं सुसंगठित ढंग से किया।
इस अवसर पर पर्यावरणविद महावीर मीणा, भगवान, दिलखुश, सत्यनारायण धाकड़, हरिराम गौड़, आशीष विजयवर्गीय सहित बड़ी संख्या में स्कूली विद्यार्थी और आमजन उपस्थित रहे। अध्यक्ष, दादू पर्यावरण संस्थान द्वारा विद्यार्थियों के लिए अमलतास विषयक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया, जिसने ज्ञान और जागरूकता दोनों को समृद्ध किया।
एक संयोजक के रूप में मेरा दृढ़ विश्वास है कि “एक जिला, एक वनस्पति” जैसे अभियान केवल पर्यावरणीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना के विस्तार के माध्यम हैं। अमलतास के संरक्षण और संवर्धन के माध्यम से हम न केवल प्रकृति की सेवा कर रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ, संतुलित और संवेदनशील पर्यावरण की नींव भी रख रहे हैं। यही इस आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि और मेरे लिए आत्मसंतोष का वास्तविक आधार है।
झलकियाँ










































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