No Problem: Learn Good Things

प्रस्तावना

जीवन और समस्या — ये दोनों मानो एक-दूसरे के पर्याय हैं। जहाँ जीवन है, वहाँ परिस्थितियाँ हैं; जहाँ परिस्थितियाँ हैं, वहाँ चुनौतियाँ हैं; और जहाँ चुनौतियाँ हैं, वहाँ तथाकथित प्रॉब्लम अवश्य है। परंतु क्या सचमुच समस्या का होना ही जीवन का सत्य है, या फिर समस्या को देखने का हमारा दृष्टिकोण ही वास्तविक समस्या है?

प्रस्तुत रचना नो प्रॉब्लम एक साधारण वाक्य के भीतर छिपे असाधारण जीवन-दर्शन को उजागर करती है। यह कविता केवल समस्याओं के अस्तित्व पर प्रश्न नहीं उठाती, बल्कि उस मानसिकता को भी स्पर्श करती है जो हर परिस्थिति में मुस्कुराकर कह देती है — नो प्रॉब्लम। यह पलायन नहीं, बल्कि स्वीकार का साहस है; यह निराशा नहीं, बल्कि सजगता का प्रकाश है।

कवि ने अत्यंत सहज संवाद शैली में एक गहरी दार्शनिक बात को अभिव्यक्त किया है कि समस्याओं से मुक्त जीवन की कल्पना करना, जीवन से ही मुक्त होने की कल्पना करने जैसा है। इसलिए समाधान मृत्यु में नहीं, दृष्टि परिवर्तन में है। जो लोग जीवन में “कोई समस्या नहीं” कहते दिखाई देते हैं, वे वास्तव में समस्या-रहित नहीं होते, बल्कि उनके भीतर एक अभ्यास होता है — परिस्थितियों को बोझ नहीं, अनुभव मानने का अभ्यास।

इस रचना का मूल भाव यह है कि नो प्रॉब्लम कहना वास्तविकता से आँखें मूँद लेना नहीं, बल्कि मन की दृढ़ता का घोष है। यह एक आंतरिक अनुशासन है, जो हमें प्रतिक्रियात्मक जीवन से सजग जीवन की ओर ले जाता है। मुस्कान के साथ दिया गया उत्तर — नो प्रॉब्लम — जीवन की जटिलताओं के बीच संतुलन, धैर्य और सकारात्मकता का प्रतीक बन जाता है।

अतः यह काव्यांश केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि एक जीवन-सूत्र है —

समस्याएँ समाप्त नहीं होतीं, पर उनका प्रभाव अवश्य परिवर्तित किया जा सकता है।

और जब मन यह स्वीकार कर लेता है कि हर परिस्थिति में कहना है — नो प्रॉब्लम,

तभी जीवन संघर्ष नहीं, साधना बन जाता है।

नो प्रॉब्लम

इंसान है तो है प्रॉब्लम 

यही सिखाया गया है हमें

कि मर जाओगे जिस दिन 

खत्म होंगी सारी प्रॉब्लम उस दिन  

तो अगर नहीं चाहें जीवन में प्रॉब्लम 

तो मरना पड़ेगा?


ये तो हुई और भी बड़ी प्रॉब्लम!

नहीं!!

मरेंगे नहीं बल्कि जियेंगे


मैं मिला हूँ कई लोगों से 

कई लोग हैं जिनके जीवन में

दूर तक नहीं है कोई प्रॉब्लम! 

मैं मिला हूँ उनसे 

बात भी की है मैंने उनसे 

पूछा भी है कई बार उनसे 

कि क्यूँ उन्हें है ही नही कोई प्रॉब्लम 

पता नहीं क्यूँ 

जवाब देने से पहले 

मुस्कुराने की आदत क्यूँ है उन सभी को

आखिरकार दिया जवाब 

कि उनका एक नियम है जनाब 

हर हाल में कह देते हैं – नो प्रॉब्लम

मैंने कहा मुझे भी बनना है उनके जैसा 

वो फिर मुस्कुराये 

और बोले 

कि बोलो – नो प्रॉब्लम 

हर बार 

हर हालात में 

बस कहो कि – नो प्रॉब्लम

रचनाकार

श्री लालबहार जी

पाठ्य उन्नयन और प्रस्तुति






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