कवि बनने की त्वरित विधि

कवि बनने की त्वरित विधि

आज के युग में कवि बनना अत्यन्त सरल हो गया है। इसके लिए न तो अध्ययन की आवश्यकता है, न साधना की, न संवेदना की।

पहला चरण—सबसे पहले अपने नाम के आगे कवि लगा लीजिए। अब आपने आधी यात्रा पूरी कर ली।

दूसरा चरण—कुछ मित्र बनाइए, जो स्वयं भी कवि हों। अब आप एक-दूसरे को मंच पर बुलाइए और एक-दूसरे की प्रशंसा कीजिए। यह साहित्यिक नहीं, “सामरिक” गठबंधन होता है।

तीसरा चरण—छन्द, मात्रा, अलंकार आदि से दूर रहिए। ये सब पुरानी और अनावश्यक चीज़ें हैं। इनसे केवल कठिनाई बढ़ती है। सरल उपाय यह है कि जो मन में आए, उसे कविता घोषित कर दीजिए।

चौथा चरण—भावों से भी दूरी बनाए रखें। भावों के लिए संवेदनशीलता चाहिए, और संवेदनशीलता से लोकप्रियता में बाधा आती है। इसके स्थान पर कुछ चुटकुले, कुछ तुकबन्दियाँ और थोड़ी-सी फूहड़ता पर्याप्त है।

अब मंच पर जाइए, ऊँची आवाज़ में पढ़िए, और तालियों की प्रतीक्षा कीजिए। तालियाँ मिलते ही आप आधिकारिक रूप से महान् कवि बन चुके हैं।

अब आप निश्चिन्त होकर स्वयं की तुलना महान् कवियों से कर सकते हैं। यह आवश्यक नहीं कि आपने उनके समान लिखा हो, आवश्यक केवल यह है कि आपने मंच साझा किया हो।

इस प्रकार, बिना साधना के सिद्धि और बिना तपस्या के प्रतिष्ठा प्राप्त की जा सकती है।

साहित्य का भविष्य उज्ज्वल है—क्योंकि अब उसे कवियों से नहीं, मंच संचालकों से दिशा मिल रही है।

रचनाकार

महेश शास्त्री

प्रस्तुति


सहयोग






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