संयुक्त परिवार और एकल परिवार बदलते समय की संवेदनशील सच्चाई
संयुक्त परिवार और एकल परिवार
बदलते समय की संवेदनशील सच्चाई
आज का समय आधुनिक युग का समय है। कोई इसमें सामंजस्यपूर्ण ढंग से अपने आपको ढाल लेता है, तो कोई ऐसा नहीं कर पाता। समस्याएँ तो आती ही रहती हैं और आती रहेंगी। एक तो पीढ़ियों का अंतर प्रभाव डालता है, दूसरा सभी को स्वतंत्रता चाहिए।
परिवार हमारी प्रथम पाठशाला है, जहाँ से हमें जीवन के सर्वश्रेष्ठ सबक मिलते हैं। परिवार के सदस्य हमारे सबसे अच्छे दोस्त, मार्गदर्शक और सहारा होते हैं। परिवार समाज की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है।
जिस परिवार में बच्चे माता-पिता के साथ रहते हैं, उसे एकल परिवार कहते हैं। जब परिवार में माता-पिता, बच्चे और दादा-दादी जैसे रिश्तेदार एक साथ रहते हैं, तो उसे संयुक्त परिवार कहा जाता है। हमारा परिवार न केवल हमारे व्यक्तिगत विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय विकास में भी योगदान देता है। रिश्तेदारों के साथ आपसी संबंधों के माध्यम से हम सामूहिक रूप से समाज और देश के विकास में भागीदार बनते हैं।
एक संवेदनशील परिवार केवल घरेलू दायित्वों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह बच्चों को अच्छे संस्कार और जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में भी मार्गदर्शन करता है। माता-पिता का प्यार और समर्थन बच्चों के जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। परिवार में ऐसा वातावरण होना चाहिए, जहाँ सदस्य स्वतंत्र रूप से अपनी राय साझा कर सकें और एक-दूसरे का समर्थन पा सकें। एक सुचारु परिवार ही समाज में सकारात्मक योगदान देने की क्षमता विकसित करता है।
परंतु आधुनिक युग में यह सदैव संभव नहीं हो पाता। कामकाज के कारण बच्चों को अलग-अलग रहना पड़ता है। जब साथ नहीं रहते, तो अपनापन भी धीरे-धीरे औपचारिक होता जाता है। यहाँ तक कि जब दादा-दादी घर आते हैं, तो बच्चे कहते हैं— “हमारे घर में गेस्ट आए हैं।”
यह अलगाव धीरे-धीरे जीवन का हिस्सा बनता जा रहा है, और बुजुर्ग अकेले रहने को मजबूर हो रहे हैं।
सृजक
प्रमिला त्रिवेदी
स्थानीय सम्पादिका,
उलझन सुलझन (लेडीज विंग)
हैदराबाद
पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति






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