महा श्रृंगार छंद - ।। होली।।

 महा श्रृंगार छंद 

।। होली।।

सेठ सांवरिया के सुन बोल,

दौड़ कर आये है नर नार।

हरो दुविधा मन की हे!नाथ,

प्यार का दे सबको उपहार।।


देखकर मुख तेरा घनश्याम,

जगी है दिल में फिर से आस।

खेलकर होली सबके साथ,

पुरातन वहीं रचाओ रास।। 

तनिक बरसाकर सबपर रंग,

सभी की नैया करदो पार।

सेठ सांवरिया के सुन बोल,

दौड़कर आये है नर नार।।


 सजी सेठानी राधा साथ,

हाथ में लेकर लाल गुलाल।

सुनाते मुरलीधर जब तान,

बदल जाती राधा की चाल।।

सजाती खूब दिलों पर रंग,

खेलकर होली का त्योंहार।

सेठ सांवरिया के सुन बोल,

 दौड़कर आये है नर नार।।

                    दैनिक अमर उजाला से साभार

रचनाकार

श्योराज बम्बेरवाल 'सेवक'

मालपुरा टोंक






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