सफलता से रूबरू हो लें

सफलता से रूबरू हो लें!

आज के प्रतिस्पर्धी दौर में जहाँ अधिकांश युवा केवल लोकप्रिय करियर विकल्पों की ओर भागते हैं, वहीं कुछ ऐसे मार्गदर्शक हैं जो युवाओं को उन रास्तों पर ले जाते हैं जिनसे न केवल सरकारी नौकरी के अवसर मिलते हैं बल्कि अनुशासन और आत्मनिर्भरता भी विकसित होती है। समीर पंवार, टैलेंट सर्च मिशन से जुड़े ऐसे ही

शिक्षक और प्रेरक हैं, जिन्होंने शॉर्टहैंड जैसे विशेष कौशल को युवाओं के बीच जागरूकता और अवसर का माध्यम बनाया है। कुणाल पवार जैसी सफलता की कहानियाँ उनके मार्गदर्शन का प्रमाण हैं। यह साक्षात्कार न सिर्फ शॉर्टहैंड के महत्व को स्पष्ट करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि एक सच्चा शिक्षक कैसे युवाओं को असफलताओं से निकालकर मंज़िल तक पहुँचा सकता है।

🌟 भूमिका

संघ लोक सेवा आयोग (SSC) द्वारा आयोजित स्टेनोग्राफर परीक्षा में सफलता पाना किसी भी युवा के लिए एक बड़ा उपलब्धि क्षण होता है। हाल ही में नैनखेड़ा (रामपुर मनिहारान) के निवासी कुणाल पवार ने अपनी मेहनत, धैर्य और लगन से यह सिद्ध किया है कि यदि मन में दृढ़ निश्चय हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं। तीसरे प्रयास में मिली यह सफलता न केवल कुणाल की व्यक्तिगत विजय है, बल्कि उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो शॉर्टहैंड और टाइपिंग जैसे विशेष कौशल के माध्यम से करियर बनाना चाहते हैं। इस साक्षात्कार में कुणाल अपने अनुभव, संघर्ष और तैयारी के उन पहलुओं को साझा कर रहे हैं, जो हर अभ्यर्थी को आगे बढ़ने की दिशा दिखाते हैं।

 

🎤 साक्षात्कार: कुणाल का 
 (स्टेनोग्राफर, SSC – DOPT)

प्रश्न 1. कुणाल जी, सबसे पहले बधाई! आप हमें अपनी प्रारंभिक शिक्षा और पृष्ठभूमि के बारे में बताइए।

उत्तर: "बहुत-बहुत धन्यवाद। मैंने दसवीं में 86% और बारहवीं में 81% अंक प्राप्त किए। बारहवीं मैंने साइंस विषयों से की, लेकिन बाद में मैंने बी.ए. में ग्रेजुएशन किया। यह निर्णय आसान नहीं था क्योंकि समाज में साइंस से पढ़ने वालों से उम्मीद अलग रहती है। लेकिन मेरे माता-पिता हमेशा मेरे साथ रहे और उन्होंने मेरा पूरा सहयोग किया।"

प्रश्न 2. शॉर्टहैंड की तैयारी शुरू करने की प्रेरणा आपको कहाँ से मिली?

उत्तर: "सच कहूँ तो शुरुआत में मुझे भी लगता था कि शॉर्टहैंड से नौकरी पाना बहुत मुश्किल है। कई लोगों से नकारात्मक बातें सुनने को मिलीं। लेकिन जब मैंने इस क्षेत्र के बारे में सही जानकारी ली और नि:शुल्क टैलेंट सर्च मिशन (मोहित तंवर बाँदूखेड़ी और समीर पंवार पिलखनी) से मार्गदर्शन लिया, तब मुझे विश्वास हुआ कि मेहनत से सब संभव है। धीरे-धीरे मैंने शॉर्टहैंड और टाइपिंग में अभ्यास करना शुरू किया और खुद को समर्पित कर दिया।"

प्रश्न 3. आपकी तैयारी का सफर कैसा रहा?

उत्तर: "मैंने तीन प्रयास किए। पहले प्रयास में रिटन क्वालीफाई कर लिया था, लेकिन स्किल टेस्ट में समय प्रबंधन सही नहीं होने के कारण बाहर हो गया।

दूसरे प्रयास में भी नंबर अच्छे थे, लेकिन महज एक अंक से फाइनल मेरिट से बाहर रह गया।

तीसरे प्रयास में मैंने पहले से दुगनी मेहनत की, रोजाना स्किल टेस्ट की प्रैक्टिस की और अपने कमजोर बिंदुओं पर फोकस किया। इस बार मेहनत रंग लाई और मेरा चयन कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय में हो गया।

प्रश्न 4. आपने शॉर्टहैंड और टाइपिंग के लिए किस तरह अभ्यास किया?

उत्तर: "शॉर्टहैंड में नियमित अभ्यास ही सबसे बड़ा मंत्र है। मैंने रोज़ाना डिक्टेशन लिखना शुरू किया, पहले धीमी स्पीड पर और फिर धीरे-धीरे 80-100 शब्द प्रति मिनट की स्पीड तक पहुँचने का प्रयास किया। टाइपिंग में भी रोज़ाना समय निकालकर अभ्यास किया, क्योंकि स्किल टेस्ट में दोनों का मेल जरूरी होता है।"

प्रश्न 5. बहुत से युवा मानते हैं कि शॉर्टहैंड से करियर बनाना कठिन है। आप उन्हें क्या संदेश देंगे?

उत्तर: "यह धारणा बिल्कुल गलत है। कठिनाई हर क्षेत्र में होती है, लेकिन यदि आप शॉर्टहैंड को गंभीरता से लेते हैं तो यह आपको बहुत अच्छे अवसर दिला सकता है। सरकारी नौकरी में स्टेनोग्राफर का पद स्थिर और सम्मानजनक है। सबसे जरूरी है—लगातार अभ्यास, धैर्य और नकारात्मक लोगों से दूरी।"

प्रश्न 6. आपने परीक्षा की लिखित तैयारी किस तरह की?

उत्तर: "मैंने ऑनलाइन कोचिंग का सहारा लिया। उससे मुझे प्रश्नों के पैटर्न समझने में मदद मिली। रोज़ाना मॉक टेस्ट और पिछली परीक्षाओं के प्रश्नपत्र हल करता था। यह अभ्यास आत्मविश्वास बढ़ाने में बहुत मददगार साबित हुआ।"

प्रश्न 7. आपकी सफलता का श्रेय आप किसे देते हैं?

उत्तर: "सबसे पहले अपने माता-पिता को, जिन्होंने हर परिस्थिति में मेरा साथ दिया। मेरे अध्यापकों को, जिन्होंने सही मार्गदर्शन दिया। और नि:शुल्क टैलेंट सर्च मिशन को, जिनकी वजह से मुझे फ्री कोचिंग और मेंटरशिप मिली।"

प्रश्न 8. उन युवाओं के लिए आपका क्या सुझाव है जो अभी करियर को लेकर असमंजस में हैं?

उत्तर: "ये सुझाव इस प्रकार हैं।

(i) सबसे पहले अपना लक्ष्य तय करें।

(ii) मेहनत को आदत बना लें।

(iii) असफलताओं से निराश न हों, बल्कि उनसे सीखें।

(iv) शॉर्टहैंड और टाइपिंग को लेकर जो भी भ्रांतियाँ हैं, उन्हें दरकिनार करें।

(v) लगातार अभ्यास ही सफलता की कुंजी है।"

प्रश्न 9. अंत में, जब आपको ऑल इंडिया 667वीं रैंक और DOPT में चयन की खबर मिली तो कैसा महसूस हुआ?

उत्तर: "वह क्षण शब्दों में बयाँ करना मुश्किल है। दिल में धड़कन तेज थी, लेकिन जब परिणाम देखा तो लगा कि मेरी मेहनत और संघर्ष रंग लाया। यह सफर मेरे लिए एक अनोखा अनुभव रहा और मैं चाहता हूँ कि इससे और युवा भी प्रेरणा लें।"

👉 यह साक्षात्कार केवल कुणाल पवार की उपलब्धि नहीं दर्शाता, बल्कि उन सभी युवाओं के लिए मार्गदर्शन है जो शॉर्टहैंड और प्रतियोगी परीक्षाओं में करियर बनाना चाहते हैं।

सूचना स्रोत

श्री समीर पवार

पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति



 






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