श्री देवराज जी का आत्मकथ्य
श्री देवराज जी का आत्मकथ्य
दिनांक 05 जनवरी, 2026 मेरे लिए एक अविस्मरणीय दिन रहा। इस दिन इस्कॉन मंदिर, राजनगर (गाजियाबाद) से श्रीमान दयालु प्रभु जी का हमारे ग्राम कल्दा, ग्रेटर नोएडा में भाई अरविंद नागर जी के निवास पर आगमन हुआ। उनके आगमन से पूरे वातावरण में एक आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो गया।
हम सभी साथियों को प्रभु जी के सान्निध्य में बैठकर प्रभु श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व पर उनके उद्गार सुनने का सौभाग्य मिला। उन्होंने अत्यंत सरल और सहज शब्दों में जीवन को समझने की दृष्टि दी।
जीवन जीने के रहस्य, जीवन का वास्तविक उद्देश्य और श्रीमद्भगवद्गीता में वर्णित कर्म, भक्ति और आत्मबोध के संदेश को उन्होंने इस प्रकार समझाया कि वह सीधे हृदय को स्पर्श कर गया।
प्रभु जी की वाणी में न तो जटिलता थी और न ही कोई दुरूह दर्शन, बल्कि ऐसा लगा मानो जीवन के उलझे हुए प्रश्नों के उत्तर स्वयं सामने स्पष्ट हो रहे हों। हम सभी ने यह अनुभव किया कि गीता केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक है।
इस अवसर पर ग्राम में संकीर्तन सभा के आयोजन का जो प्रस्ताव श्रीमान दयालु प्रभु जी ने रखा, उसे सभी साथियों ने पूरे हर्ष और उत्साह के साथ स्वीकार किया। यह निर्णय हमारे गांव के आध्यात्मिक जीवन को और समृद्ध करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
श्रीमान दयालु प्रभु जी द्वारा दिए गए श्रीमद्भगवद्गीता के पुनीत विचारों का पुण्य लाभ हम सभी को प्राप्त हुआ। उनके स्नेह, सरलता और मार्गदर्शन के लिए मैं हृदय की गहराइयों से उन्हें बार-बार नमन करता हूँ और कोटिशः धन्यवाद प्रकट करता हूँ।
सूचना स्रोत
श्री देवराज जी
पाठ्य उन्नयन और विस्तार


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