आत्मकथ्य — संगीता जड़िया

 आत्मकथ्य

— संगीता जड़िया


मेरा नाम संगीता जड़िया है। मेरा जन्म 28 नवम्बर 1977 को हुआ। मैं विश्व-विख्यात चित्रकार श्री बद्री लाल जी की सुपोत्री हूँ। कला, साधना और सेवा—ये तीनों धाराएँ मेरे जीवन में स्वाभाविक रूप से प्रवाहित होती रही हैं।

शिक्षा और कलात्मक प्रतिभा

मेरी प्रारंभिक शिक्षा के दौरान ही पढ़ाई के साथ-साथ खेल और कला में मेरी विशेष रुचि रही। मैंने नेशनल टेबल टेनिस प्रतियोगिता में भाग लिया।
पारिवारिक वातावरण कला-प्रधान होने के कारण चित्रकला के साथ-साथ गोटा-पत्ती, राजस्थानी मांडणा, मेहंदी और कशीदाकारी जैसी पारंपरिक कलाओं में दक्षता प्राप्त की। इनमें मेहंदी और मांडणा मेरे लिए विशेष रूप से प्रिय रहे।

शैक्षणिक रूप से मैं बचपन से ही मेधावी रही और गणित विषय में एम.एससी. की डिग्री प्राप्त की। इसके अतिरिक्त मैंने एक वर्षीय कंप्यूटर डिप्लोमा भी पूर्ण किया।

आध्यात्मिक यात्रा और जीवन दृष्टि

आर्य समाज से जुड़ाव के कारण बचपन से ही वैदिक हवन-संध्या और वैदिक साहित्य से मेरा गहरा परिचय रहा। इस साहित्य ने मेरे चिंतन और जीवन दृष्टि को दिशा दी।
मेरे दादाजी को हस्तरेखा विज्ञान का विशेष अनुभव था, जिससे प्रेरित होकर मैंने भी इस विषय का अध्ययन प्रारंभ किया।

वर्ष 2016 से यूट्यूब और अन्य माध्यमों द्वारा मेरी आध्यात्मिक यात्रा और अधिक गहन होती चली गई। समय के साथ मुझे आध्यात्मिक स्वप्नों के माध्यम से दिव्य संकेत प्राप्त होने लगे।
कोरोना काल में आसपास के लोगों की सेवा करते हुए यह अनुभूति और प्रबल हुई कि सेवा ही सबसे बड़ा पुण्य है।

शिव-शक्ति आध्यात्मिक यात्रा के माध्यम से मेरी कुंडलिनी जागृति का अनुभव हुआ। आत्मिक उद्देश्य की पूर्ति और युग परिवर्तन की प्रक्रिया में स्वयं को ईश्वर द्वारा चुना जाना—मेरे जीवन का परम सौभाग्य है।
मैंने अनेक बहनों को सकारात्मक अभिरुचियों और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने का कार्य किया है, जिससे उनके जीवन के प्रति दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन आया और वे जीवन को आध्यात्मिक दृष्टि से देखने लगे।

साहित्यिक योगदान

माँ सरस्वती की असीम कृपा से वर्ष 2025 में मुझे “16 संस्कार” विषय पर लेखन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इसी क्रम में मैं अजमेर लेखिका ग्रुप से जुड़ी और कहानी व कविता लेखन प्रारंभ किया।
मेरे लेखन को पहचान मिली और “जीवन के नाम अंतिम खत” पुस्तक में मेरा पत्र चयनित हुआ।

मेरे लिए साहित्य जीवन-यात्रा की एक पगडंडी है—जिसके माध्यम से ब्रह्मांड से प्राप्त आध्यात्मिक विचारों को विश्व के हर कोने तक पहुँचाना और वैश्विक शांति की स्थापना में योगदान देना मेरा अंतिम उद्देश्य है। यह लेखन कार्य मैं पूर्णतः ईश्वर को समर्पित भाव से करती हूँ।

सामाजिक सहभागिता और कार्यक्षेत्र

  • एम.एससी. (गणित)

  • 1 वर्षीय कंप्यूटर डिप्लोमा

  • बाल मनोविज्ञान परामर्श

  • पारिवारिक नक्षत्र परामर्श

  • ट्विन फ्लेम परामर्श

  • लेखिका

संबद्ध संस्थाएँ एवं मंच

  • श्रेष्ठा महिला स्वर्णकार समाज संस्था
    (हमारी विरासत – हमारा अभियान)

  • अजमेर लेखिका मंच

  • Good Vibes Happiness Group

जीवन संदेश

बचपन से ही मेरे मन में यह भावना रही है कि यह विश्व तभी सुंदर बन सकता है जब सब मिल-जुलकर एक-दूसरे के काम आएँ और विश्व शांति की ओर अग्रसर हों।
सेवा, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना—यही मेरे जीवन का सार है।

सूचना स्रोत 

 

पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति 








Comments

Popular posts from this blog

श्री रमनपाल सिंह का आत्मकथ्य

आत्ममंथन और सामाजिक उत्तरदायित्व का बोध कराने वाली अनुभूतियां

सुनिता मीणा की लेखनी