यात्रा वृत्तांत - शिवराज जी कुर्मी
भूमिका
यह अवसर केवल एक यात्रा का नहीं, बल्कि दो शिक्षकों, दो साहित्य-साधकों और दो संवेदनशील दृष्टियों के आत्मीय समागम का था। पाती अपनों की जैसी अनूठी साहित्यिक मुहिम से जुड़े वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षाविद सेवानिवृत्त श्री शिवराज जी कुर्मी का बनेठा आगमन, स्मृतियों, इतिहास और वर्तमान के बीच एक सजीव सेतु बन गया। युवा कवि एवं शिक्षक श्री हंसराज हंस द्वारा स्थानीय ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक धरोहरों का तथ्यात्मक परिचय, उनके निहितार्थों का विवेचन, तथा स्वरचित पुस्तक भेंट कर किया गया सम्मान—इस यात्रा को साधारण भ्रमण से ऊपर उठाकर ज्ञान-विनिमय, भाव-संवाद और सांस्कृतिक उत्तराधिकार की जीवंत अभिव्यक्ति बना देता है। विद्यालय परिसर में आत्मीय स्वागत के साथ यह समूचा घटनाक्रम लेखन की उस परंपरा को सुदृढ़ करता है, जिसमें यात्रा अनुभव नहीं, बल्कि विचार, संवेदना और जिम्मेदारी का विस्तार बन जाती है।
यात्रा वृत्तांत-शिवराज जी कुर्मी
वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्रशासनिक अधिकारी डॉ सूरज सिंह नेगी साहब की अनूठी मुहिम, पाती अपनों को, से पुस्तक, लिख दूं पाती यादों के गलियारों से, लिखित पत्र संख्या 88
जो युवा कवि हंसराज हंस, बनेठा की ऐतिहासिक धरोहरों को आंखों से देखने एवं समझने का अवसर मिला।
1. राजा जी द्वारा निर्मित कुई, महल एवं बावड़ी
2. ऐतिहासिक शिव मंदिर
3. बाग के बालाजी
4. श्री देवनारायण मंदिर
5. श्री कल्याण महाराज मंदिर
6. श्री गोपाल महाराज मंदिर और
7. ईसरदा बांध
श्री हंसराज हंस जी, बनेठा द्वारा सभी ऐतिहासिक धरोहरों का दर्शन करवाकर ऐतिहासिक महत्व बताया गया। बनेठा को उप तहसील का दर्जा मिला हुआ है। लेकिन सुविधाएं नाम मात्र की हैं। टोंक से बनेठा मात्र 25 किलोमीटर है। 24 घंटे में केवल एक रोडवेज बस है जो सवाईमाधोपुर आती-जाती है। बाकी समय में कार, ऑटो ही आते-जाते हैं।
बनेठा गांव अरावली पहाड़ियों के समीप बसा हुआ है। पहाड़ियों पर नाम मात्र को वृक्ष दिखाई देते हैं। लोगों द्वारा अरावली का खनन निरंतर किया जा रहा है। वर्तमान में अरावली संरक्षण पर बवाल मचा हुआ है। हम सबको भी अरावली संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए। यह हमारी ऐतिहासिक धरोहर और राजस्थान की जीवन रेखा है।
बनेठा से 2 किलोमीटर की दूरी पर राजस्थान सरकार द्वारा सबसे लम्बा, ईसरदा बांध, बनाया गया है। जिसमें 28 गेट हैं। इसका पानी पेयजल आपूर्ति एवं सिंचाई के लिए उपलब्ध होगा। डॉ सूरज सिंह नेगी साहब भी इस बांध के प्रशासनिक अधिकारी रह चुके थे। आपके मार्गदर्शन में विस्थापितों को मुआवजा, शिकायतों का निराकरण किया गया था।
हमारा आज का दिन ऐतिहासिक धरोहरों के नाम रहा। आज के भ्रमण में भरपूर आनन्द आया। सायंकाल एक सामाजिक कार्यक्रम में व्यस्त रहा।
शिवराज जी कुर्मी
टोडारायसिंह (राजस्थान)
यादों के गलियारों से
अवसर था साहित्यकार एवं शिक्षाविद सेवानिवृत्त शिवराज कुर्मी सहाब का बनेठा आगमन।
श्रीमान सूरज सिंह नेगी जी द्वारा पाती अपनों की मुहिम में यादों के गलियारों से प्रकाशित पुस्तक में बनेठा ग्राम में स्थित राजा जी की कुई (बावड़ी) के बारे में आदरणीय शिवराज कुर्मी ने जानना व अपनी आंखों से देखने की इच्छा व्यक्त की गई। शिवराज जी को राजा की कुई के साथ साथ ग्राम के पौराणिक व धार्मिक स्थलों का भी भ्रमण करवाया गया जिनमें प्राचीन शिवालय
बालाजी का भव्य मंदिर, पहाड़ी पर स्थित गुर्जर समाज के आराध्य देव श्री देवनारायण भगवान का मंदिर के दर्शन करके उनका मन गदगद हो गया। चाय अल्पाहार के बाद रसिया की पहाड़ी,ईसरदा बांध का भराव क्षैत्र आदि प्राकृतिक व मनोरम दृश्यों का अवलोकन करके आपने अपनी एक छोटी सी यात्रा को हमेशा हमेशा के लिए यादगार बना दिया। शिवराज कुर्मी सहाब का दुपट्टा व यादों के गलियारों से पुस्तक भेंट कर सम्मान कर मैं अपने आपको बहुत ही कृतज्ञ महसूस कर रहा हूं।
हंसराज हंस
बनेठा टोंक
झलकियाँ
















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