साहित्य प्रेमी मंडल एवं स्व. चौधरी जिले सिंह के सुपुत्र राजेश कुमार का आत्मकथ्य
**आत्मकथ्य
राजेश कुमार का आत्मकथ्य
(उपाध्यक्ष, साहित्य प्रेमी मंडल
एवं स्व. चौधरी जिले सिंह के सुपुत्र)
आदरणीय अध्यक्ष महोदय,
मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि,
सम्मानित कविगण, साहित्यकार, समाजसेवी,
एवं उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों को
मेरा सादर प्रणाम।
आज का यह क्षण मेरे लिए अत्यंत भावुक, गौरवपूर्ण और स्मृतियों से भरा हुआ है। मेरे पूज्य पिता स्वर्गीय चौधरी जिले सिंह जी की स्मृति में साहित्य प्रेमी मंडल के तत्वावधान में आयोजित यह काव्य संध्या एवं सम्मान समारोह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उनके जीवन मूल्यों, सामाजिक प्रतिबद्धता और साहित्य प्रेम को सजीव रूप देने का एक विनम्र प्रयास है।
मेरे पिता जीवन भर समाज के अंतिम व्यक्ति तक संवेदना, सहयोग और संस्कार पहुँचाने में विश्वास रखते थे। वे मानते थे कि साहित्य केवल शब्दों का सौंदर्य नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली चेतना है। आज इस मंच पर देश के वरिष्ठ कवियों, समाजसेवियों और शिक्षाविदों की उपस्थिति यह प्रमाणित करती है कि उनका जीवन-दर्शन व्यर्थ नहीं गया।
आज के इस आयोजन में कविवर बलवीर सिंह ‘करुण’ जी को साहित्य रत्न सम्मान तथा वरिष्ठ योगाचार्य एवं समाजसेवी पीतम सिंह प्रियतम जी को समाज रत्न सम्मान प्रदान किया जाना, उन मूल्यों का सम्मान है जिनके लिए मेरे पिता सदैव खड़े रहे—साहित्य, साधना और समाज।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि रामचरण सिंह ‘साथी’ जी जैसे अनुभवी साहित्य साधक द्वारा किया जाना, मुख्य अतिथि के रूप में भारत सरकार के प्रशासनिक अधिकारी श्री के.के. पाठक जी की उपस्थिति, तथा विशिष्ट अतिथि श्री प्रवेश शर्मा जी (डायरेक्टर, DDCA) का सान्निध्य—इस आयोजन की गरिमा को नई ऊँचाइयाँ प्रदान करता है।
कवि पी.के. आज़ाद जी के काव्यपाठ और आदरणीय बलवीर सिंह ‘करुण’ जी की प्रभावशाली काव्य प्रस्तुति ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। अंतरराष्ट्रीय कवि डॉ. प्रवीण शुक्ल जी का कुशल संचालन कार्यक्रम की आत्मा बना।
मैं हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ उन सभी सम्मानित अतिथियों का, जनप्रतिनिधियों का, शिक्षाविदों का, साहित्यकारों का और समाजसेवियों का, जिन्होंने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से इस आयोजन को सार्थक बनाया। आप सभी की उपस्थिति मेरे पिता को सच्ची श्रद्धांजलि है।
अंत में, मैं साहित्य प्रेमी मंडल का, अपने परिवार का और विशेष रूप से उन सभी सहयोगियों का धन्यवाद करता हूँ जिन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने में अपना योगदान दिया।
मेरे पिता की स्मृति को जीवंत रखने का यह संकल्प आप सभी के सहयोग से ही संभव है।
आप सभी का हृदय से धन्यवाद। 🙏
चित्रदीर्घा







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