राष्ट्रीय बाल साहित्यकार सम्मेलन
भूमिका
सोलहवें राष्ट्रीय बाल साहित्यकार सम्मेलन के तकनीकी सत्र की अध्यक्षता राजस्थान के वरिष्ठ साहित्यकार, आर ए एस अधिकारी एवं पाती लेखन मुहिम के प्रणेता डॉ. सूरज सिंह नेगी ने की तो उन्होंने कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करते हुए अपने विचार व्यक्त किये।
विवरण
उदयपुर (पुकार)। सलिला संस्था सलूंबर एवं राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में प्रसार शिक्षा निदेशालय संभागर में आयोजित 16वें राष्ट्रीय बाल साहित्यकार सम्मेलन के तकनीकी सत्र की अध्यक्षता राजस्थान के वरिष्ठ साहित्यकार, आर ए एस अधिकारी एवं पाती लेखन मुहिम के प्रणेता डॉ. सूरज सिंह नेगी ने की।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. नेगी ने आज के बदलते परिवेश की सबसे गंभीर चुनौती की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि –
“सोशल मीडिया ने बच्चों के जीवन को सुविधा दी है, लेकिन इसका अंधाधुंध प्रयोग उन्हें मोबाइल का गुलाम बनाता जा रहा है। बचपन, जो कभी खेल, कहानी और किताबों की सुगंध से भरा होता था, अब स्क्रीन की रोशनी में कैद होता जा रहा है।”
उन्होंने कहा कि समाज को चाहिए कि बच्चों को जीवंत उदाहरणों से जोड़ा जाए। आदर्श केवल किताबों के पात्र नहीं, बल्कि हमारे जीवन में उपस्थित वे व्यक्ति भी हैं, जिनसे सीखकर बच्चे आत्मबल और नैतिकता अर्जित कर सकते हैं। यदि हम चाहते हैं कि नई पीढ़ी मजबूत और संस्कारित बने, तो हमें बच्चों से मित्रवत संवाद स्थापित करना होगा। उन्हें केवल उपदेश न दें, बल्कि उनके साथ चलें, उनके साथ बोलें, उनके साथ पढ़ें और उन्हें सिखाएँ कि मोबाइल के बटन से कहीं अधिक ताकत कलम और किताब में है।
डॉ. नेगी ने कहा कि यह समय बाल साहित्यकारों के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी का है। बाल साहित्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण का आधार है। जब हम बच्चों को कविताएँ, कहानियाँ और लघुकथाएँ देते हैं, तो हम उन्हें केवल शब्द ही नहीं देते, बल्कि उन शब्दों में संस्कार, संवेदना और सृजनशीलता भी देते हैं। यही संस्कार उन्हें भविष्य का जागरूक नागरिक और संवेदनशील इंसान बनाते हैं।
उन्होंने स्पष्ट कहा – “आज का बच्चा यदि किताबों से कटेगा तो कल वह समाज से कट जाएगा। मोबाइल क्षणिक आनंद दे सकता है, लेकिन साहित्य जीवनभर साथ देने वाली दिशा और दृष्टि देता है। अतः माता-पिता, शिक्षक और साहित्यकार सभी मिलकर बच्चों को किताबों की ओर लौटाएँ। यही आने वाले कल का सबसे बड़ा निवेश होगा।”
चित्रशाला





















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